मज्जनु कीन्ह मधुर फल खाए
मज्जनु कीन्ह मधुर फल खाए
चौपाई २, दोहा २५ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
मज्जनु कीन्ह मधुर फल खाए। तासु निकट पुनि सब चलि आए॥ तेहिं सब आपनि कथा सुनाई। मैं अब जाब जहाँ रघुराई॥ २ ॥
अर्थ
[आज्ञा पाकर] सब ने स्नान किया, मीठे फल खाए और फिर सब उसके पास चले आए। तब उसने अपनी सब कथा कह सुनाई [और कहा--] मैं अब जाऊँगी जहाँ श्रीरघुराई हैं।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “गुफा में स्वयंप्रभा के दर्शन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता-खोज में वानरों का गुफा में तपस्विनी स्वयंप्रभा से मिलन और उनके द्वारा मार्गदर्शन का वर्णन है।
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गुफा में स्वयंप्रभा के दर्शन