बदरीबन कहुँ सो गई प्रभु अग्या

दोहा २५ · किष्किन्धाकाण्ड

दोहा पाठ

बदरीबन कहुँ सो गई प्रभु अग्या धरि सीस। उर धरि राम चरन जुग जे बंदत अज ईस॥ २५ ॥

अर्थ

प्रभु की आज्ञा सिर पर धारण कर और श्रीरामजी के युगल चरणों को, जिनकी ब्रह्मा और महेश भी वंदना करते हैं, हृदय में धारण कर वह (स्वयंप्रभा) बदरीबन को चली गयी।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “गुफा में स्वयंप्रभा के दर्शन” प्रकरण का दोहा २५ है। इस प्रकरण में सीता-खोज में वानरों का गुफा में तपस्विनी स्वयंप्रभा से मिलन और उनके द्वारा मार्गदर्शन का वर्णन है।

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गुफा में स्वयंप्रभा के दर्शन