सो पुनि गई जहाँ रघुनाथा
सो पुनि गई जहाँ रघुनाथा
चौपाई ४, दोहा २५ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
सो पुनि गई जहाँ रघुनाथा। जाइ कमल पद नाएसि माथा॥ नाना भाँति बिनय तेहिं कीन्ही। अनपायनी भगति प्रभु दीन्ही॥ ४ ॥
अर्थ
और वह स्वयं वहाँ गयी जहाँ श्रीरघुनाथजी थे। उसने जाकर प्रभु के चरणकमलों में मस्तक नवाया और बहुत प्रकार से विनती की। प्रभु ने उसे अपनी अनपायिनी (अचल) भक्ति दी।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “गुफा में स्वयंप्रभा के दर्शन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता-खोज में वानरों का गुफा में तपस्विनी स्वयंप्रभा से मिलन और उनके द्वारा मार्गदर्शन का वर्णन है।
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गुफा में स्वयंप्रभा के दर्शन