दूरि ते ताहि सबन्हि सिरु नावा

चौपाई १, दोहा २५ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

दूरि ते ताहि सबन्हि सिरु नावा। पूछें निज बृत्तांत सुनावा॥ तेहिं तब कहा करहु जल पाना। खाहु सुरस सुंदर फल नाना॥ १ ॥

अर्थ

दूर से ही सब ने उसे सिर नवाया और पूछने पर अपना सब वृत्तान्त कह सुनाया। तब उसने कहा--जलपान करो और भाँति-भाँति के रसीले सुन्दर फल खाओ।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “गुफा में स्वयंप्रभा के दर्शन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता-खोज में वानरों का गुफा में तपस्विनी स्वयंप्रभा से मिलन और उनके द्वारा मार्गदर्शन का वर्णन है।

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गुफा में स्वयंप्रभा के दर्शन