मानस निर्माण की तिथि

रामचरितमानस के निर्माण का शुभ समय बताकर कवि इस रचना के आरम्भ को पावन उत्सव के रूप में प्रस्तुत करते हैं। तिथि का उल्लेख काव्य को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दोनों गरिमा देता है।

बालकाण्ड · प्रकरण १३ / ५९

प्रकरण पाठ

चौपाई

कीन्हि प्रस्न जेहि भाँति भवानी। जेहि बिधि संकर कहा बखानी॥ सो सब हेतु कहब मैं गाई। कथा प्रबंध बिचित्र बनाई॥ १ ॥

अर्थ:

जिस प्रकार श्रीपार्वतीजी ने श्रीशिवजी से प्रश्न किया और जिस प्रकार से श्रीशिवजी ने उत्तर कहा, वह सब कारण मैं विचित्र कथा-प्रबंध बनाकर गाकर कहूँगा।

चौपाई

जेहिं यह कथा सुनी नहिं होई। जनि आचरजु करै सुनि सोई॥ कथा अलौकिक सुनहिं जे ग्यानी। नहिं आचरजु करहिं अस जानी॥ रामकथा कै मिति जग नाहीं। असि प्रतीति तिन्ह के मन माहीं॥ नाना भाँति राम अवतारा। रामायन सत कोटि अपारा॥ २-३ ॥

अर्थ:

जिसने यह कथा पहले न सुनी हो, वह इसे सुनकर आश्चर्य न करे। जो ज्ञानी इस विचित्र कथाको सुनते हैं, वे यह जानकर आश्चर्य नहीं करते कि संसार में रामकथा की कोई सीमा नहीं है (रामकथा अनन्त है)। उनके मन में ऐसा विश्वास रहता है। नाना प्रकार से श्रीरामचन्द्रजी के अवतार हुए हैं और सौ करोड़ तथा अपार रामायण हैं।

चौपाई

कलपभेद हरिचरित सुहाए। भाँति अनेक मुनीसन्ह गाए॥ करिअ न संसय अस उर आनी। सुनिअ कथा सादर रति मानी॥ ४ ॥

अर्थ:

कल्पभेद के अनुसार श्रीहरि के सुन्दर चरित्रों को मुनीश्वरों ने अनेक प्रकार से गाया है। हृदय में ऐसा विचारकर संदेह न कीजिए और आदर सहित प्रेम से इस कथा को सुनिए।

दोहा

राम अनंत अनंत गुन अमित कथा बिस्तार। सुनि आचरजु न मानिहहिं जिन्ह कें बिमल बिचार॥ ३३ ॥

अर्थ:

श्रीरामचन्द्रजी अनन्त हैं, उनके गुण भी अनन्त हैं और उनकी कथाओं का विस्तार भी असीम है। अतएव जिनके विचार निर्मल हैं, वे इस कथा को सुनकर आश्चर्य नहीं मानेंगे।