मानस निर्माण की तिथि
रामचरितमानस के निर्माण का शुभ समय बताकर कवि इस रचना के आरम्भ को पावन उत्सव के रूप में प्रस्तुत करते हैं। तिथि का उल्लेख काव्य को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दोनों गरिमा देता है।
बालकाण्ड · प्रकरण १३ / ५९
प्रकरण पाठ
जेहिं यह कथा सुनी नहिं होई। जनि आचरजु करै सुनि सोई॥ कथा अलौकिक सुनहिं जे ग्यानी। नहिं आचरजु करहिं अस जानी॥ रामकथा कै मिति जग नाहीं। असि प्रतीति तिन्ह के मन माहीं॥ नाना भाँति राम अवतारा। रामायन सत कोटि अपारा॥ २-३ ॥
अर्थ:
जिसने यह कथा पहले न सुनी हो, वह इसे सुनकर आश्चर्य न करे। जो ज्ञानी इस विचित्र कथाको सुनते हैं, वे यह जानकर आश्चर्य नहीं करते कि संसार में रामकथा की कोई सीमा नहीं है (रामकथा अनन्त है)। उनके मन में ऐसा विश्वास रहता है। नाना प्रकार से श्रीरामचन्द्रजी के अवतार हुए हैं और सौ करोड़ तथा अपार रामायण हैं।