कीन्हि प्रस्न जेहि भाँति भवानी
कीन्हि प्रस्न जेहि भाँति भवानी
चौपाई १, दोहा ३३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कीन्हि प्रस्न जेहि भाँति भवानी। जेहि बिधि संकर कहा बखानी॥ सो सब हेतु कहब मैं गाई। कथा प्रबंध बिचित्र बनाई॥ १ ॥
अर्थ
जिस प्रकार श्रीपार्वतीजी ने श्रीशिवजी से प्रश्न किया और जिस प्रकार से श्रीशिवजी ने उत्तर कहा, वह सब कारण मैं विचित्र कथा-प्रबंध बनाकर गाकर कहूँगा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस रचना की तिथि” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामचरितमानस रचना के शुभ आरम्भ और राम-कथा की अनन्तता का महत्त्व का वर्णन है।
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मानस रचना की तिथि