राम अनंत अनंत गुन अमित कथा
राम अनंत अनंत गुन अमित कथा
दोहा ३३ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
राम अनंत अनंत गुन अमित कथा बिस्तार। सुनि आचरजु न मानिहहिं जिन्ह कें बिमल बिचार॥ ३३ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी अनन्त हैं, उनके गुण भी अनन्त हैं और उनकी कथाओं का विस्तार भी असीम है। अतएव जिनके विचार निर्मल हैं, वे इस कथा को सुनकर आश्चर्य नहीं मानेंगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस रचना की तिथि” प्रकरण का दोहा ३३ है। इस प्रकरण में रामचरितमानस रचना के शुभ आरम्भ और राम-कथा की अनन्तता का महत्त्व का वर्णन है।
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मानस रचना की तिथि