जेहिं यह कथा सुनी नहिं होई
जेहिं यह कथा सुनी नहिं होई
चौपाई २-३, दोहा ३३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जेहिं यह कथा सुनी नहिं होई। जनि आचरजु करै सुनि सोई॥ कथा अलौकिक सुनहिं जे ग्यानी। नहिं आचरजु करहिं अस जानी॥ रामकथा कै मिति जग नाहीं। असि प्रतीति तिन्ह के मन माहीं॥ नाना भाँति राम अवतारा। रामायन सत कोटि अपारा॥ २-३ ॥
अर्थ
जिसने यह कथा पहले न सुनी हो, वह इसे सुनकर आश्चर्य न करे। जो ज्ञानी इस विचित्र कथाको सुनते हैं, वे यह जानकर आश्चर्य नहीं करते कि संसार में रामकथा की कोई सीमा नहीं है (रामकथा अनन्त है)। उनके मन में ऐसा विश्वास रहता है। नाना प्रकार से श्रीरामचन्द्रजी के अवतार हुए हैं और सौ करोड़ तथा अपार रामायण हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस रचना की तिथि” प्रकरण का चौपाई २-३, दोहा ३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामचरितमानस रचना के शुभ आरम्भ और राम-कथा की अनन्तता का महत्त्व का वर्णन है।
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मानस रचना की तिथि