कलपभेद हरिचरित सुहाए

चौपाई ४, दोहा ३३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कलपभेद हरिचरित सुहाए। भाँति अनेक मुनीसन्ह गाए॥ करिअ न संसय अस उर आनी। सुनिअ कथा सादर रति मानी॥ ४ ॥

अर्थ

कल्पभेद के अनुसार श्रीहरि के सुन्दर चरित्रों को मुनीश्वरों ने अनेक प्रकार से गाया है। हृदय में ऐसा विचारकर संदेह न कीजिए और आदर सहित प्रेम से इस कथा को सुनिए।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस रचना की तिथि” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामचरितमानस रचना के शुभ आरम्भ और राम-कथा की अनन्तता का महत्त्व का वर्णन है।

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मानस रचना की तिथि