सोइ पुरारि कोदंडु कठोरा

चौपाई २, दोहा २५० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सोइ पुरारि कोदंडु कठोरा। राज समाज आजु जोइ तोरा॥ त्रिभुवन जय समेत बैदेही। बिनहिं बिचार बरइ हठि तेही॥ २ ॥

अर्थ

उसी पुरारि (शिवजी) के कठोर धनुष को आज राजसमाज में जो भी तोड़ेगा, तीनों लोकों की विजय के साथ बैदेही बिना किसी विचार के हठपूर्वक उसी को वरेगी।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बंदीजनों द्वारा जनकप्रतिज्ञा की घोषणा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में बंदीजनों द्वारा सभा में जनक की शिवधनुष-प्रतिज्ञा का उद्घोष और राजाओं का उत्साह का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
बंदीजनों द्वारा जनकप्रतिज्ञा की घोषणा