विनिश्चितं वदामि ते न अन्यथा

श्लोक १२२ (ग), दोहा १२२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

श्लोक पाठ

विनिश्चितं वदामि ते न अन्यथा वचांसि मे। हरिं नरा भजन्ति येऽतिदुस्तरं तरन्ति ते॥ १२२ (ग) ॥

अर्थ

मैं आपसे भलीभाँति निश्चित किया हुआ सिद्धान्त कहता हूँ—मेरे वचन अन्यथा (मिथ्या) नहीं हैं कि जो मनुष्य श्रीहरि का भजन करते हैं, वे अत्यन्त दुस्तर संसारसागर को पार कर जाते हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “भजन महिमा” प्रकरण का श्लोक १२२ (ग), दोहा १२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हरि भजन और प्रभु के नाम-स्मरण से भवसागर पार होने की महिमा का वर्णन है।

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भजन महिमा