मसकहि करइ बिरंचि प्रभु अजहि मसक

दोहा १२२ (ख) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

मसकहि करइ बिरंचि प्रभु अजहि मसक ते हीन। अस बिचारि तजि संसय रामहि भजहिं प्रबीन॥ १२२ (ख) ॥

अर्थ

प्रभु ब्रह्मा को मच्छर कर सकते हैं और ब्रह्मा को मच्छर से भी तुच्छ बना सकते हैं। ऐसा विचारकर चतुर पुरुष सब सन्देह त्यागकर श्रीरामजी को ही भजते हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “भजन महिमा” प्रकरण का दोहा १२२ (ख) है। इस प्रकरण में हरि भजन और प्रभु के नाम-स्मरण से भवसागर पार होने की महिमा का वर्णन है।

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भजन महिमा