उमा रमा ब्रह्मादि बंदिता
उमा रमा ब्रह्मादि बंदिता
चौपाई ५, दोहा २४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
उमा रमा ब्रह्मादि बंदिता। जगदंबा संततमनिंदिता॥ ५ ॥
अर्थ
(शिवजी कहते हैं--) हे उमा! जगदंबा रमा (सीताजी) ब्रह्मा आदि देवताओं से वन्दित और सदा अनिन्दित (सर्वगुणसम्पन्न) हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामराज्य का वर्णन” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्य में धर्म, सुख, समृद्धि और प्रजा के कल्याण का वर्णन है।
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रामराज्य का वर्णन