तुम्ह सर्बग्य तग्य तम पारा
तुम्ह सर्बग्य तग्य तम पारा
चौपाई १, दोहा ९४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
तुम्ह सर्बग्य तग्य तम पारा। सुमति सुसील सरल आचारा॥ ग्यान बिरति बिग्यान निवासा। रघुनायक के तुम्ह प्रिय दासा॥ १ ॥
अर्थ
आप सबज्ञ, तत्त्वज्ञ, तम से पार हैं; उत्तम बुद्धि, सुशील, सरल आचरणवाले, ज्ञान, वैराग्य और विज्ञान के निवास हैं, और श्रीरघुनाथजी के प्रिय दास हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा