प्रभु अपने अबिबेक ते बूझउँ स्वामी

दोहा ९३ (ख) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

प्रभु अपने अबिबेक ते बूझउँ स्वामी तोहि। कृपासिंधु सादर कहहु जानि दास निज मोहि॥ ९३ (ख) ॥

अर्थ

हे प्रभो! हे स्वामी! मैं अपने अविवेक के कारण आपसे पूछता हूँ। हे कृपासिंधु! मुझे अपना “निज दास” जानकर आदरपूर्वक मेरे प्रश्न का उत्तर कहिये।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का दोहा ९३ (ख) है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा