कारन कवन देह यह पाई
कारन कवन देह यह पाई
चौपाई २, दोहा ९४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
कारन कवन देह यह पाई। तात सकल मोहि कहहु बुझाई॥ राम चरित सर सुंदर स्वामी। पायहु कहाँ कहहु नभगामी॥ २ ॥
अर्थ
आपने यह देह किस कारण से पाई ? हे तात! सब समझाकर मुझसे कहिये। हे स्वामी ! हे आकाशगामी ! यह सुन्दर रामचरितमानस आपने कहाँ पाया, सो कहिये।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा