तेहि कौतुक कर मरमु न काहूँ
तेहि कौतुक कर मरमु न काहूँ
चौपाई ३, दोहा ७९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
तेहि कौतुक कर मरमु न काहूँ। जाना अनुज न मातु पिताहूँ॥ जानु पानि धाए मोहि धरना। स्यामल गात अरुन कर चरना॥ ३ ॥
अर्थ
उस खेल का मर्म किसी ने नहीं जाना, न छोटे भाइयों ने और न माता-पिता ने ही। वे श्याम शरीर और लाल-लाल हथेली और चरणतल वाले बालरूप श्रीरामजी घुटने और हाथों के बल मुझे पकड़ने को दौड़े।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा