ते सठ हठ बस संसय करहीं
ते सठ हठ बस संसय करहीं
चौपाई ५, दोहा ७३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
ते सठ हठ बस संसय करहीं। निज अग्यान राम पर धरहीं॥ ५ ॥
अर्थ
वे मूर्ख हठ के वश होकर सन्देह करते हैं और अपना अज्ञान श्रीरामजी पर आरोपित करते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ७३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा