ताते यह तन मोहि प्रिय भयउ

दोहा ११४ (क) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

ताते यह तन मोहि प्रिय भयउ राम पद नेह। निज प्रभु दरसन पायउँ गए सकल संदेह॥ ११४ (क) ॥

अर्थ

मुझे अपना यह काक शरीर इसीलिये प्रिय है कि इसमें मुझे श्रीरामजी के चरणों का प्रेम प्राप्त हुआ। इसी शरीर से मैंने अपने प्रभु के दर्शन पाये और मेरे सब सन्देह जाते रहे (दूर हुए)।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “लोमशजी से शाप और अनुग्रह” प्रकरण का दोहा ११४ (क) है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डिजी को लोमश मुनि द्वारा शाप और अनुग्रह मिलने तथा रामभक्ति दृढ़ होने का वर्णन है।

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लोमशजी से शाप और अनुग्रह