कथा सकल मैं तुम्हहि सुनाई
कथा सकल मैं तुम्हहि सुनाई
चौपाई ८, दोहा ११४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
कथा सकल मैं तुम्हहि सुनाई। काग देह जेहिं कारन पाई॥ कहिउँ तात सब प्रस्न तुम्हारी। राम भगति महिमा अति भारी॥ ८ ॥
अर्थ
जिस कारण से मैंने कौए की देह पायी, वह सारी कथा आपको सुना दी। हे तात! मैंने आपके सब प्रश्नों के उत्तर कहे। अहा! रामभक्ति की बड़ी भारी महिमा है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “लोमशजी से शाप और अनुग्रह” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा ११४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डिजी को लोमश मुनि द्वारा शाप और अनुग्रह मिलने तथा रामभक्ति दृढ़ होने का वर्णन है।
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लोमशजी से शाप और अनुग्रह