तब प्रभु भूषन बसन मगाए

चौपाई ३, दोहा १७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

तब प्रभु भूषन बसन मगाए। नाना रंग अनूप सुहाए॥ सुग्रीवहि प्रथमहिं पहिराए। बसन भरत निज हाथ बनाए॥ ३ ॥

अर्थ

तब प्रभु ने अनेक रंगों के अनुपम और सुन्दर भूषण-वस्त्र मँगवाये। सबसे पहले सुग्रीव को पहनाये। वस्त्र भरत ने अपने हाथ से बनाए।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “वानरों की और निषाद की विदाई” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा वानरों और निषाद की प्रेमपूर्ण विदाई एवं आलिंगन का वर्णन है।

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वानरों की और निषाद की विदाई