सुनु मम बचन सत्य अब भाई

चौपाई ६, दोहा १०९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनु मम बचन सत्य अब भाई। हरितोषन ब्रत द्विज सेवकाई॥ अब जनि करहि बिप्र अपमाना। जानेसु संत अनंत समाना॥ ६ ॥

अर्थ

हे भाई! अब मेरा सत्य वचन सुन। द्विजों की सेवा ही भगवान् को प्रसन्न करनेवाला व्रत है। अब कभी ब्राह्मण का अपमान न करना। संतों को अनन्त श्रीभगवान् ही के समान जानना।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा १०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु की क्षमायाचना, शाप के अनुग्रह में परिणत होने और काकभुशुण्डि की आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन है।

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गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह