रघुपति पुरीं जन्म तव भयऊ

चौपाई ५, दोहा १०९ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

रघुपति पुरीं जन्म तव भयऊ। पुनि तैं मम सेवाँ मन दयऊ॥ पुरी प्रभाव अनुग्रह मोरें। राम भगति उपजिहि उर तोरें॥ ५ ॥

अर्थ

[प्रथम तो] तेरा जन्म श्रीरघुनाथजी की पुरी में हुआ। फिर तूने मेरी सेवा में मन लगाया। पुरी के प्रभाव और मेरी कृपा से तेरे हृदय में रामभक्ति उत्पन्न होगी।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु की क्षमायाचना, शाप के अनुग्रह में परिणत होने और काकभुशुण्डि की आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन है।

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गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह