सुनि सप्रेम मम बानी देखि दीन
सुनि सप्रेम मम बानी देखि दीन
दोहा ८३ (क) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
सुनि सप्रेम मम बानी देखि दीन निज दास। बचन सुखद गंभीर मृदु बोले रमानिवास॥ ८३ (क) ॥
अर्थ
मेरी प्रेमयुक्त वाणी सुनकर और अपने दास को दीन देखकर रमानिवास श्रीरामजी सुखदायक, गंभीर और कोमल वचन बोले--।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का दोहा ८३ (क) है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा