भगत बछलता प्रभु कै देखी
भगत बछलता प्रभु कै देखी
चौपाई ४, दोहा ८३ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
भगत बछलता प्रभु कै देखी। उपजी मम उर प्रीति बिसेषी॥ सजल नयन पुलकित कर जोरी। कीन्हिउँ बहु बिधि बिनय बहोरी॥ ४ ॥
अर्थ
प्रभु की भक्तवत्सलता देखकर मेरे हृदय में बहुत ही प्रेम उत्पन्न हुआ। फिर मैंने [आनंद से] नेत्रों में जल भरकर, पुलकित होकर और हाथ जोड़कर बहुत प्रकार से विनती की।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा