काकभसुंडि मागु बर अति प्रसन्न मोहि
काकभसुंडि मागु बर अति प्रसन्न मोहि
दोहा ८३ (ख) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
काकभसुंडि मागु बर अति प्रसन्न मोहि जानि। अनिमादिक सिधि अपर रिधि मोच्छ सकल सुख खानि॥ ८३ (ख) ॥
अर्थ
हे काकभुशुण्डि! तू मुझे अत्यन्त प्रसन्न जानकर वर माँग। अणिमादिक सिद्धियाँ, अपर ऋद्धियाँ तथा मोक्ष, सकल सुखों की खानि।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का दोहा ८३ (ख) है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा