सुनि सब कथा समीरकुमारा

चौपाई २, दोहा ६७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनि सब कथा समीरकुमारा। नाघत भयउ पयोधि अपारा॥ लंकाँ कपि प्रबेस जिमि कीन्हा। पुनि सीतहि धीरजु जिमि दीन्हा॥ २ ॥

अर्थ

संपाती से सब कथा सुनकर पवनपुत्र हनुमानजी जिस तरह अपार समुद्र को लाँघ गये, फिर हनुमानजी ने जैसे लंका में प्रवेश किया और फिर जैसे सीताजी को धीरज दिया, सो सब कहा।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा