जेहि बिधि कपिपति कीस पठाए

चौपाई १, दोहा ६७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

जेहि बिधि कपिपति कीस पठाए। सीता खोज सकल दिसि धाए॥ बिबर प्रबेस कीन्ह जेहि भाँती। कपिन्ह बहोरि मिला संपाती॥ १ ॥

अर्थ

जिस प्रकार वानरराज सुग्रीव ने वानरों को भेजा और वे सीताजी की खोज में जिस प्रकार सब दिशाओं में गये, जिस प्रकार उन्होंने बिल में प्रवेश किया और फिर जैसे वानरों को सम्पाती मिला, वह कथा कही।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा