सुनि प्रभु बचन मगन सब भए
सुनि प्रभु बचन मगन सब भए
चौपाई ५, दोहा ८ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि प्रभु बचन मगन सब भए। निमिष निमिष उपजत सुख नए॥ ५ ॥
अर्थ
प्रभु के वचन सुनकर सब प्रेम और आनन्द में मग्र हो गये। इस प्रकार पल-पल में उन्हें नये-नये सुख उत्पन्न हो रहे हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
राम का स्वागत, भरत मिलाप