सुनि भुसुंडि के बचन सुभ देखि

दोहा १२४ (ख) · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

सुनि भुसुंडि के बचन सुभ देखि राम पद नेह। बोलेउ प्रेम सहित गिरा गरुड़ बिगत संदेह॥ १२४ (ख) ॥

अर्थ

भुशुण्डिजी के मंगलमय वचन सुनकर और श्रीरामजी के चरणों में उनका अतिशय प्रेम देखकर सन्देह से भलीभाँति छूटे हुए गरुड़जी प्रेम सहित वचन बोले।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का दोहा १२४ (ख) है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।

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रामायण माहात्म्य और फलस्तुति