जासु नाम भव भेषज हरन घोर
जासु नाम भव भेषज हरन घोर
दोहा १२४ (क) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
जासु नाम भव भेषज हरन घोर त्रय सूल। सो कृपाल मोहि तो पर सदा रहउ अनुकूल॥ १२४ (क) ॥
अर्थ
जिनका नाम जन्म-मरण रूपी रोग की औषधि है और जो घोर तीनों तापों को हरने वाले हैं, वे कृपालु मुझ पर सदा अनुकूल रहें।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का दोहा १२४ (क) है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।
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रामायण माहात्म्य और फलस्तुति