सुनत बचन जहँ तहँ जन धाए

चौपाई २, दोहा ११ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनत बचन जहँ तहँ जन धाए। सुग्रीवादि तुरत अन्हवाए॥ पुनि करुनानिधि भरतु हँकारे। निज कर राम जटा निरुआरे॥ २ ॥

अर्थ

भगवान् के वचन सुनते ही सेवक जहाँ-तहाँ दौड़े और तुरंत ही उन्होंने सुग्रीवादि को स्नान कराया। फिर करुणानिधान श्रीरामजी ने भरतजी को बुलाया और उनकी जटाओं को अपने हाथों से सुलझाया।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।

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राम का स्वागत, भरत मिलाप