अन्हवाए प्रभु तीनिउ भाई
अन्हवाए प्रभु तीनिउ भाई
चौपाई ३, दोहा ११ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
अन्हवाए प्रभु तीनिउ भाई। भगत बछल कृपाल रघुराई॥ भरत भाग्य प्रभु कोमलताई। सेष कोटि सत सकहिं न गाई॥ ३ ॥
अर्थ
तदनन्तर भक्तवत्सल कृपालु प्रभु श्रीरघुनाथजी ने तीनों भाइयों को स्नान कराया। भरतजी का भाग्य और प्रभु की कोमलता का वर्णन शेषजी करोड़ों बार भी नहीं कर सकते।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।
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राम का स्वागत, भरत मिलाप