अवधपुरी अति रुचिर बनाई

चौपाई १, दोहा ११ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

अवधपुरी अति रुचिर बनाई। देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई॥ राम कहा सेवकन्ह बुलाई। प्रथम सखन्ह अन्हवावहु जाई॥ १ ॥

अर्थ

अवधपुरी बहुत ही सुन्दर सजायी गयी। देवताओं ने पुष्पों की वर्षा की झड़ी लगा दी। श्रीरामचन्द्रजी ने सेवकों को बुलाकर कहा कि तुम लोग जाकर पहले मेरे सखाओं को स्नान कराओ।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।

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राम का स्वागत, भरत मिलाप