सुनहु तात जेहि कारन आयउँ
सुनहु तात जेहि कारन आयउँ
चौपाई १, दोहा ६४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनहु तात जेहि कारन आयउँ। सो सब भयउ दरस तव पायउँ॥ देखि परम पावन तव आश्रम। गयउ मोह संसय नाना भ्रम॥ १ ॥
अर्थ
हे तात! सुनिये, मैं जिस कारण से आया था, वह सब कार्य तो यहाँ आते ही पूरा हो गया। फिर आपके दर्शन भी प्राप्त हो गये। आपका परम पवित्र आश्रम देखकर ही मेरा मोह, सन्देह और अनेक प्रकार के भ्रम सब जाते रहे।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा