अब श्रीराम कथा अति पावनि

चौपाई २, दोहा ६४ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

अब श्रीराम कथा अति पावनि। सदा सुखद दुख पुंज नसावनि॥ सादर तात सुनावहु मोही। बार बार बिनवउँ प्रभु तोही॥ २ ॥

अर्थ

अब हे तात! आप मुझे श्रीरामजी की अत्यन्त पवित्र करनेवाली, सदा सुख देनेवाली और दुःखसमूह का नाश करनेवाली कथा आदरसहित सुनाइये। हे प्रभो! मैं बार-बार आपसे यही विनती करता हूँ।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा