सुमन बृष्टि नभ संकुल भवन चले
सुमन बृष्टि नभ संकुल भवन चले
दोहा ८ (ख) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
सुमन बृष्टि नभ संकुल भवन चले सुखकंद। चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नगर नारि नर बृंद॥ ८ (ख) ॥
अर्थ
आकाश में फूलों की वृष्टि से सब भर गया। सुखकंद श्रीरामजी भवन को चले। नगर के स्त्री-पुरुषों का समूह अटारियों पर चढ़कर उनके दर्शन कर रहा है।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “राम का स्वागत, भरत मिलाप” प्रकरण का दोहा ८ (ख) है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के स्वागत और भरत मिलाप के आनंदमय प्रसंग का वर्णन है।
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राम का स्वागत, भरत मिलाप