सुजस पुरान बिदित निगमागम
सुजस पुरान बिदित निगमागम
चौपाई ४, दोहा ५१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
सुजस पुरान बिदित निगमागम। गावत सुर मुनि संत समागम॥ कारुनीक ब्यलीक मद खंडन। सब बिधि कुसल कोसला मंडन॥ ४ ॥
अर्थ
आपका सुन्दर यश पुराणों, वेदों में और तन्त्रादि शास्त्रों में प्रकट है। देवता, मुनि और संतों के समुदाय उसे गाते हैं। आप करुणा करनेवाले और झूठे मद का नाश करनेवाले, सब प्रकार से कुशल (निपुण) श्रीअयोध्याजी के भूषण ही हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “नारद की स्तुति और प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद द्वारा श्रीराम के दर्शन, स्तुति-गान और ब्रह्मलोक प्रस्थान का वर्णन है।
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नारद की स्तुति और प्रस्थान