सोइ सच्चिदानंद घन रामा
सोइ सच्चिदानंद घन रामा
चौपाई २, दोहा ७२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
सोइ सच्चिदानंद घन रामा। अज बिग्यान रूप बल धामा॥ ब्यापक ब्याप्य अखंड अनंता। अखिल अमोघसक्ति भगवंता॥ २ ॥
अर्थ
श्रीरामजी वही सच्चिदानन्दघन हैं जो अज, विज्ञान रूप, बल के धाम, व्यापक एवं व्याप्य, अखण्ड, अनन्त, अखिल, अमोघशक्ति और भगवान् हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।
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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा