अगुन अदभ्र गिरा गोतीता

चौपाई ३, दोहा ७२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

अगुन अदभ्र गिरा गोतीता। सबदरसी अनवद्य अजीता॥ निर्मम निराकार निरमोहा। नित्य निरंजन सुख संदोहा॥ ३ ॥

अर्थ

वे निर्गुण, महान, वाणी और इन्द्रियों से परे, सब कुछ देखने वाले, निर्दोष, अजेय, ममतारहित, निराकार, मोहरहित, नित्य, निरंजन, सुख की राशि हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा