सो सुत प्रिय पितु प्रान समाना

चौपाई ३, दोहा ८७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

सो सुत प्रिय पितु प्रान समाना। जद्यपि सो सब भाँति अयाना॥ एहि बिधि जीव चराचर जेते। त्रिजग देव नर असुर समेते॥ ३ ॥

अर्थ

वह पुत्र पिताको प्राणों के समान प्रिय होता है, यद्यपि (चाहे) वह सब प्रकार से अज्ञानी (मूर्ख) ही हो। इस प्रकार त्रिजग के देव, मनुष्य और असुरों समेत जितने भी चराचर जीव हैं,

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा