अखिल बिस्व यह मोर उपाया

चौपाई ४, दोहा ८७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

अखिल बिस्व यह मोर उपाया। सब पर मोहि बराबरि दाया॥ तिन्ह महँ जो परिहरि मद माया। भजै मोहि मन बच अरु काया॥ ४ ॥

अर्थ

[उनसे भरा हुआ] यह सम्पूर्ण विश्व मेरा ही पैदा किया हुआ है। अतः सब पर मेरी बराबर दया है। परन्तु इनमें से जो मद और माया छोड़कर मन, वचन और शरीर से मुझको भजता है,

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ के मोह और काकभुशुण्डि द्वारा रामकथा श्रवण का वर्णन है।

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गरुड़ मोह, काकभुशुण्डि की रामकथा