सो कुल धन्य उमा सुनु जगत

दोहा १२७ · उत्तरकाण्ड

दोहा पाठ

सो कुल धन्य उमा सुनु जगत पूज्य सुपुनीत। श्रीरघुबीर परायन जेहिं नर उपज बिनीत॥ १२७ ॥

अर्थ

हे उमा! सुनो। वह कुल धन्य है, संसारभर के लिए पूज्य है और परम पवित्र है, जिसमें श्रीरघुवीर-परायण विनीत पुरुष उत्पन्न हो।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “रामायण माहात्म्य और फलस्तुति” प्रकरण का दोहा १२७ है। इस प्रकरण में रामायण की महिमा, तुलसीदास की विनय और पाठ-श्रवण के पुण्यफल का वर्णन है।

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रामायण माहात्म्य और फलस्तुति