सिवँ राखी श्रुति नीति अरु मैं
सिवँ राखी श्रुति नीति अरु मैं
दोहा १०९ (घ) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
सिवँ राखी श्रुति नीति अरु मैं नहिं पावा क्लेस। एहि बिधि धरेउँ बिबिधि तनु ग्यान न गयउ खगेस॥ १०९ (घ) ॥
अर्थ
शिवजी ने वेद की मर्यादा की रक्षा की और मैंने क्लेश भी नहीं पाया। इस प्रकार हे पक्षिराज! मैंने बहुत-से शरीर धारण किये, पर मेरा ज्ञान नहीं गया।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह” प्रकरण का दोहा १०९ (घ) है। इस प्रकरण में गुरु की क्षमायाचना, शाप के अनुग्रह में परिणत होने और काकभुशुण्डि की आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन है।
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गुरु की क्षमायाचना, शाप का अनुग्रह