श्रीमुख बचन सुनत सब भाई

चौपाई १, दोहा ४२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

श्रीमुख बचन सुनत सब भाई। हरषे प्रेम न हृदयँ समाई॥ करहिं बिनय अति बारहिं बारा। हनूमान हियँ हरष अपारा॥ १ ॥

अर्थ

भगवान के श्रीमुख से ये वचन सुनकर सब भाई हर्षित हो गये। प्रेम उनके हृदयों में समाता नहीं। वे बार-बार बड़ी विनती करते हैं। विशेषकर हनुमानजी के हृदय में अपार हर्ष है।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “भरत का प्रश्न, राम का उपदेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा भरतजी के प्रश्न और राम के धर्म, भक्ति तथा संत-असंत-विवेक के उपदेश का वर्णन है।

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भरत का प्रश्न, राम का उपदेश