पुनि रघुपति निज मंदिर गए
पुनि रघुपति निज मंदिर गए
चौपाई २, दोहा ४२ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
पुनि रघुपति निज मंदिर गए। एहि बिधि चरित करत नित नए॥ बार बार नारद मुनि आवहिं। चरित पुनीत राम के गावहिं॥ २ ॥
अर्थ
तदनन्तर श्रीरघुपति अपने मंदिर को गये। इस प्रकार वे नित्य नयी लीला करते हैं। नारद मुनि बार-बार आते हैं और श्रीरामजी के पवित्र चरित्र गाते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “भरत का प्रश्न, राम का उपदेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा भरतजी के प्रश्न और राम के धर्म, भक्ति तथा संत-असंत-विवेक के उपदेश का वर्णन है।
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भरत का प्रश्न, राम का उपदेश