सन इव खल पर बंधन करई

चौपाई ९, दोहा १२१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड

चौपाई पाठ

सन इव खल पर बंधन करई। खाल कढ़ाइ बिपति सहि मरई॥ खल बिनु स्वारथ पर अपकारी। अहि मूषक इव सुनु उरगारी॥ ९ ॥

अर्थ

किन्तु दुष्ट लोग सन की भाँति दूसरों को बाँधते हैं और [उन्हें बाँधने के लिये] अपनी खाल कढ़वाकर विपत्ति सहते हुए मर जाते हैं। हे सर्पों के शत्रु गरुड़जी! सुनिये; दुष्ट बिना किसी स्वार्थ के साँप और चूहे के समान अकारण ही दूसरों का अपकार करते हैं।

संदर्भ

यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर” प्रकरण का चौपाई ९, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गरुड़ के सात प्रश्नों पर काकभुशुण्डि का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर