पर संपदा बिनासि नसाहीं
पर संपदा बिनासि नसाहीं
चौपाई १०, दोहा १२१ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
पर संपदा बिनासि नसाहीं। जिमि ससि हति हिम उपल बिलाहीं॥ दुष्ट उदय जग आरति हेतू। जथा प्रसिद्ध अधम ग्रह केतू॥ १० ॥
अर्थ
वे परायी सम्पत्ति का नाश करके स्वयं नष्ट हो जाते हैं, जैसे चन्द्रमा के प्रकाश में ओले गलकर नष्ट हो जाते हैं। दुष्ट का उदय जगत् के दुःख के लिये ही होता है, जैसे प्रसिद्ध अधम ग्रह केतु का उदय।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर” प्रकरण का चौपाई १०, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गरुड़ के सात प्रश्नों पर काकभुशुण्डि का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।
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गरुड़ के सात प्रश्न और उत्तर