सगुन होहिं सुंदर सकल मन प्रसन्न
सगुन होहिं सुंदर सकल मन प्रसन्न
दोहा २ · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
सगुन होहिं सुंदर सकल मन प्रसन्न सब केर। प्रभु आगवन जनाव जनु नगर रम्य चहुँ फेर॥ २ ॥
अर्थ
इतने में ही सब सुन्दर शकुन होने लगे और सबके मन प्रसन्न हो गये। नगर भी चारों ओर से रमणीक हो गया। मानो ये सब-के-सब चिह्न प्रभु के [शुभ] आगमन को जना रहे हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “मंगलाचरण” प्रकरण का दोहा २ है। इस प्रकरण में उत्तरकाण्ड के आरंभ में प्रभु राम, गुरु और संतों की पवित्र वंदना तथा राम के आगमन के शुभ शकुनों का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
मंगलाचरण