कौसल्यादि मातु सब मन अनंद अस
कौसल्यादि मातु सब मन अनंद अस
दोहा ३ · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
कौसल्यादि मातु सब मन अनंद अस होइ। आयउ प्रभु श्री अनुजजुत कहन चहत अब कोइ॥ ३ ॥
अर्थ
कौसल्या आदि सब माताओं के मन में ऐसा आनन्द हो रहा है जैसे अभी कोई कहना ही चाहता है कि सीताजी और लक्ष्मणजी सहित प्रभु श्रीरामचन्द्रजी आ गये।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “मंगलाचरण” प्रकरण का दोहा ३ है। इस प्रकरण में उत्तरकाण्ड के आरंभ में प्रभु राम, गुरु और संतों की पवित्र वंदना तथा राम के आगमन के शुभ शकुनों का वर्णन है।
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मंगलाचरण